उज्जैन, 4 अक्टूबर। महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला उज्जैन द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आंगन मिलन सेवा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सभापति, नगर निगम श्रीमती कलावती यादव ने भाग लिया और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं तथा बच्चों को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर विधायक श्री अनिल जैन कालुहेड़ा,श्री संजय अग्रवाल, श्री जगदीश पांचाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यह आयोजन 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक चल रहे अभियान का हिस्सा है, जिसका मूल संदेश है कि आंगनवाड़ी केंद्र पोषण, शिक्षा और सम्मान का केंद्र बने। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पूजन के साथ हुआ। स्थल पर आकर्षक रंगोली बनाई गई, जिसमें आईसीडीएस तथा आंगन मिलन का संदेश अंकित था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षिकाएं पारंपरिक परिधान में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण पोषण प्रदर्शनी रही। थालियों में अंकुरित दालें, मूंग, चना, लड्डू, ठेकुआ, सत्तू, खिचड़ी, ककड़ी-टमाटर से सजी सलाद और अन्य स्थानीय पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए। प्रत्येक व्यंजन के साथ नामपट्टिका लगाई गई, ताकि माताएं और अभिभावक कम लागत में घर पर बनने वाले पोषक आहार को समझ सकें। प्रदर्शनी का उद्देश्य संतुलित आहार, साफ अनाज और बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं के पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

श्रीमती कलावती यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्थानीय पौष्टिक व्यंजनों की सराहना की। इस अवसर पर लाभार्थियों की रक्तचाप जांच भी की गई। मंच से आंगन मिलन सेवा की रूपरेखा बताते हुए कहा गया कि शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य, सेवा से सुरक्षित समाज और सम्मान से समृद्ध प्रदेश का लक्ष्य आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। मुख्य अतिथि सहित अतिथियों का अंगवस्त्रम और माल्यार्पण से सम्मान किया गया।

बच्चे और महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। सांस्कृतिक प्रस्तुति में फूलों की मालाओं से सजे बच्चों ने भाग लिया। समारोह के दौरान पौधरोपण भी किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के बैनर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया के चित्र अंकित थे।

मुख्य अतिथि श्रीमती कलावती यादव ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना करते हुए अभिभावकों से आह्वान किया कि वे आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ें, बच्चों को समय पर पूरक पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा दिलवाएं तथा स्वच्छ, पौष्टिक आहार की आदत घर से ही डालें।