जब ग्रामीण महिलाओं के हाथों में हुनर, आजीविका के साधन और परस्पर सहयोग का संबल मिल जाता है, तो वे न केवल अपनी तकदीर बदल देती हैं, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर भी बदल देती हैं। इसी बदलाव की जीवंत मिसाल पेश कर रहा है, बड़वानी जिले के विकासखंड ठीकरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुराना का खोड़ियार आजीविका समूह।
इस समूह की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक जीवन शैली और आजीविका की सीमाओं से बाहर निकलकर यदि सामूहिक प्रयास किए जाएं, तो आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है। इन महिलाओं ने पशुपालन जैसे पारंपरिक क्षेत्र को आधुनिक और व्यावसायिक रूप देते हुए सामूहिक भैंस पालन और दुग्ध उत्पादन को अपने स्वरोजगार का मुख्य आधार बनाया है।
मध्य प्रदेश शासन द्वारा संचालित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन और आपसी एकजुटता के बल पर इन महिलाओं ने चूल्हे-चौके की सीमाओं को लांघकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया है। आज इनकी यह सामूहिक पहल न केवल उनके परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है।
सामूहिक प्रयास और वित्तीय सहयोग 'खोड़ियार आजीविका समूह' में कुल दस महिलाएं सम्मिलित हैं। इस सफल उद्यम को गति देने के लिए बैंक लिंकेज के माध्यम से 17 लाख रुपये का सीसीएल (CCL) ऋण प्राप्त हुआ है, जबकि समूह की महिलाओं द्वारा 5 लाख रुपये का स्वंय का अंशदान भी लगाया गया है।
उत्पादन और दैनिक आमदनी समूह के सदस्यों द्वारा इस डेयरी व्यवसाय का कुशल संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में इस सामूहिक इकाई के पास कुल 40 पशु हैं, जिनमें 35 दुधारू पशु शामिल हैं। इनसे प्रतिदिन औसतन 150-160 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। दूध के अलावा समूह सदस्यों द्वारा त्योहारों व विशेष अवसरों पर मावा और शुद्ध घी तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है। उत्पादित दूध व डेयरी उत्पादों की सप्लाई मण्डवाडा एवं सुराना की स्थानीय डेयरी व मिठाई दुकानों पर की जा रही है।
इस सामूहिक गतिविधि के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 9000 से 10,000 रुपये की दुग्ध बिक्री होती है, जिससे सभी खर्चों को निकालकर समूह को प्रतिदिन 4,000 से 4,500 रुपये तक का शुद्ध अनुमानित लाभ प्राप्त हो रहा है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती ममता बताती हैं कि, "आजीविका मिशन से जुड़ने और समय पर वित्तीय सहायता मिलने से आज हमारा समूह आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इससे न केवल हमारी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि समाज में हमारा सम्मान भी बढ़ा है। " खोड़ियार आजीविका समूह की यह प्रेरणादायक कहानी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
